आज हम Day-1 फिर से शुरू कर रहे हैं, और हमारा टॉपिक है कबीरदास।
OSSTET के सिलेबस (Page 20) में कबीरदास के 8 दोहे और 1 पद साफ़-साफ़ लिखे हैं
Concept Class: कबीरदास (सिर्फ 5 मिनट में)
कबीरदास 'निर्गुण' संत थे। वे मूर्ति पूजा, मंदिर-मस्जिद नहीं मानते थे। वे मानते थे कि भगवान हमारे अंदर ही हैं।
सिलेबस में जो 8 दोहे और 1 पद दिए हैं, उनका "निचोड़" (Summary) समझो, क्योंकि एग्जाम में सवाल ऐसे आएगा: "जल में कुंभ... दोहे में कुंभ किसका प्रतीक है?"
Day 1: Kabir Das (कबीरदास)
OSSTET Syllabus Special Note
Concept: OSSTET के सिलेबस में कबीरदास के 8 दोहे और 1 पद निर्धारित हैं। परीक्षा में प्रश्न इन्ही पंक्तियों के अर्थ से पूछे जाएंगे। आज हम इन्हीं का विश्लेषण करेंगे।
1. सिलेबस वाले दोहे और उनका अर्थ
1. गुरु गोविन्द दोउ खड़े...
अर्थ: गुरु का स्थान ईश्वर से ऊँचा है क्योंकि गुरु ने ही ईश्वर का ज्ञान दिया है।
2. पानी केरा बुद बुदा...
अर्थ: मनुष्य का जीवन पानी के बुलबुले की तरह क्षणभंगुर (Temporary) है।
3. माटी कहै कुम्हार से...
अर्थ: जीवन का चक्र। आज हम जिसे रौंद रहे हैं, कल हम मिट्टी बनकर उसी में मिल जाएंगे।
4. जल में कुंभ, कुंभ में जल...
अर्थ: कुंभ = शरीर, जल = परमात्मा। आत्मा और परमात्मा एक ही हैं, बस शरीर का पर्दा है।
5. कस्तूरी कुंडल बसै...
अर्थ: ईश्वर हमारे हृदय में है, उसे बाहर (तीर्थ/जंगल) में ढूँढना व्यर्थ है।
6. साधु ऐसा चाहिए...
अर्थ: साधु का स्वभाव 'सूप' जैसा होना चाहिए जो अच्छाई (सार) रख ले और बुराई (थोथा) उड़ा दे।
7. कल करै सो आज कर...
अर्थ: समय का महत्व। कार्य को टालना नहीं चाहिए क्योंकि मृत्यु का समय निश्चित नहीं है।
विशिष्ट पद: माया महा ठगिनी
"माया महा ठगिनी हम जानी..."
कबीर ने माया को 'ठगिनी' कहा है जो त्रिगुण (सत्व, रज, तम) का फंदा लेकर सबको फंसाती है।
2. Previous Year Questions (Test)
Q1. 'जल में कुंभ, कुंभ में जल है' - यहाँ 'कुंभ' किसका प्रतीक है?
(A) घड़े का
(B) शरीर का ✅
(C) संसार का
(D) आत्मा का
Q2. कबीर के अनुसार साधु का स्वभाव कैसा होना चाहिए?
(A) पानी जैसा
(B) सूप जैसा ✅
(C) मिट्टी जैसा
(D) तलवार जैसा
Q3. 'कस्तूरी' किस पशु की नाभि में होती है?
(A) गाय
(B) शेर
(C) मृग (हिरण) ✅
(D) हाथी
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