Day 2: Surdas (सूरदास)
Bal Varnan & Bhramar Geet (Syllabus Special)
1. सूरदास: परीक्षा उपयोगी तथ्य
| उपाधि | वात्सल्य रस का सम्राट (Emperor of Parental Love) |
| भाषा | ब्रजभाषा (Braj Bhasha) |
| प्रमुख ग्रंथ | सूरसागर (Sursagar), सूरसारावली, साहित्य लहरी |
| गुरु | वल्लभाचार्य (अष्टछाप के प्रमुख कवि) |
2. बाल वर्णन (Childhood) - सिलेबस अनुसार
OSSTET सिलेबस में बाल लीला के 4 प्रमुख पद दिए गए हैं:
1. मैया मैं नहिं माखन खायो...
प्रसंग: बाल कृष्ण के मुख पर मक्खन लगा है, यशोदा उन्हें पकड़ लेती हैं।
अर्थ: कृष्ण अपनी सफाई देते हैं- "माँ, मैंने मक्खन नहीं खाया। सुबह होते ही तुम मुझे गाय चराने भेज देती हो (भोर भयो गैयन के पाछे), मैं तो शाम को लौटा हूँ। यह मक्खन मेरे मुँह पर ग्वाल-बालों ने जबरदस्ती लगा दिया है।" (बाल सुलभ बहाने)।
2. मैया मोहि दाऊ बहुत खिझायो...
प्रसंग: बड़े भाई बलराम (दाऊ) कृष्ण को चिढ़ाते हैं, जिसकी शिकायत वे माँ से कर रहे हैं।
अर्थ: कृष्ण कहते हैं- "माँ, दाऊ मुझे बहुत चिढ़ाते हैं। वे कहते हैं कि तुझे यशोदा ने जन्म नहीं दिया, तुझे तो बाज़ार से खरीदा गया है (मोल को लीन्हो)। क्योंकि नंद बाबा और यशोदा दोनों गोरे हैं, तू काला (श्याम) कैसे हो गया?"
3. मैया कबहुँ बढ़ेगी चोटी...
प्रसंग: कृष्ण दूध नहीं पीना चाहते, पर माँ कहती हैं दूध पीने से चोटी बड़ी होगी।
अर्थ: कृष्ण शिकायत करते हैं- "माँ, मैं कब से दूध पी रहा हूँ, पर मेरी चोटी आज भी छोटी ही है। तू तो कहती थी कि यह बलराम भैया (बेनी) जैसी लंबी और मोटी हो जाएगी।"
4. जसुमति हरि पालनै झुलावै...
प्रसंग: वात्सल्य रस। माँ यशोदा कृष्ण को सुला रही हैं।
अर्थ: यशोदा हरि (कृष्ण) को पालने में झुला रही हैं। कभी प्यार करती हैं, कभी पुचकारती हैं और लोरी गाती हैं ताकि कान्हा सो जाएं।
3. भ्रमरगीत सार (उद्धव-गोपी संवाद)
कृष्ण मथुरा चले गए हैं और अपने मित्र उद्धव (Udho) को गोपियों को समझाने भेजा है कि वे "योग/निर्गुण ब्रह्म" की पूजा करें। गोपियाँ एक भंवरे (Bhramar) को माध्यम बनाकर उद्धव पर व्यंग्य करती हैं।
1. ऊधो मन न भए दस बीस...
अर्थ: गोपियाँ कहती हैं- "हे उद्धव! हमारे पास 10-20 मन (दिल) नहीं हैं। एक ही मन था, जो कृष्ण के साथ मथुरा चला गया। अब हम तुम्हारे इस निर्गुण ब्रह्म की आराधना किस मन से करें?"
2. निर्गुन कौन देस को बासी...
अर्थ: गोपियाँ उद्धव का मजाक उड़ाती हैं- "तुम जिस निर्गुण (निराकार) भगवान की बात कर रहे हो, वो किस देश का रहने वाला है? उसके माता-पिता कौन हैं? उसकी पत्नी और दासी कौन हैं?" (गोपियाँ सगुण भक्ति का पक्ष ले रही हैं)।
3. ऊधो मन माने की बात...
अर्थ: प्रेम तो मन मानने (पसंद) की बात है। जैसे 'विष का कीड़ा' विष ही खाता है, उसे अमृत अच्छा नहीं लगता। वैसे ही हमें कृष्ण पसंद हैं, तुम्हारा योग नहीं।
4. अखियाँ हरि दर्शन की प्यासी...
अर्थ: गोपियों की आँखें कृष्ण के दर्शन के लिए प्यासी हैं। तुम्हारे योग के सूखे उपदेशों से इनकी प्यास नहीं बुझेगी।
4. Previous Year Questions (Self Test)
Q1. 'मैया मोहि दाऊ बहुत खिझायो' - यहाँ 'दाऊ' कौन हैं?
(A) नन्द बाबा
(B) बलराम ✅
(C) सुदामा
(D) उद्धव
Q2. 'ऊधो मन न भए दस बीस' - यह कथन किसका है?
(A) राधा का
(B) यशोदा का
(C) गोपियों का ✅
(D) देवकी का
Q3. सूरदास की भक्ति किस भाव की है?
(A) दास्य भाव
(B) साख्य और वात्सल्य भाव ✅
(C) वीर भाव
(D) शांत भाव
Q4. गोपियों ने निर्गुण ब्रह्म की तुलना किससे की है?
(A) कड़वी ककड़ी से
(B) अमृत से
(C) 'कौन देस को बासी' (अंजान व्यक्ति) से ✅
(D) सूर्य से
(Day-2 Complete!)
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