OSSTET Hindi (Day-3): Tulsidas & Bihari Syllabus Notes | Kevat Prasang & Dohe

OSSTET Unit-II Tulsidas (Kevat Prasang, Bharat Mahima) aur Bihari ke 4 Dohe (Kanak Kanak, Batras Lalach) ka arth. Syllabus wise notes aur PYQ for 2026

OSSTET Hindi (Day-3): Tulsidas & Bihari Syllabus Notes | Kevat Prasang & Dohe

Day 3: तुलसीदास & बिहारी

OSSTET Syllabus Special Notes

Exam Weightage: 2-3 Marks

1. तुलसीदास: केवट प्रसंग और भरत-महिमा

सिलेबस चेक: OSSTET में तुलसीदास के केवल दो प्रसंग हैं: 'केवट प्रसंग' और 'भरत-महिमा'।

(A) केवट प्रसंग (प्रेम और भक्ति)

कहानी: राम गंगा पार करना चाहते हैं। केवट उन्हें नाव में बिठाने से मना कर देता है।

केवट का तर्क: "प्रभु, आपके चरणों की धूल जादुई है (अहिल्या पत्थर से नारी बन गई)। मेरी नाव काठ (लकड़ी) की है, अगर वह भी नारी बन गई तो मैं क्या करूंगा? पहले मैं आपके पैर धोऊंगा (पखारूंगा), फिर नाव में बैठाऊंगा।"

भाव: यह केवट की चतुराई और अनन्य भक्ति है। राम उसकी प्रेमपूर्ण जिद्द मान लेते हैं।

(B) भरत-महिमा (त्याग)

कहानी: राम को वनवास मिलने पर भरत उन्हें मनाने चित्रकूट जाते हैं।

भाव: भरत का राम के प्रति निस्वार्थ प्रेम। जहाँ दुनिया राज्य (सत्ता) के लिए लड़ती है, भरत राज्य ठुकरा कर राम की खड़ाऊं (चरण पादुका) मांगते हैं। तुलसीदास ने भरत को 'आदर्श भाई' और 'भक्त' बताया है।

2. बिहारी: 4 प्रमुख दोहे (Syllabus Wise)

सिलेबस में बिहारी के ये 4 दोहे ही दिए गए हैं। इनका अर्थ रट लें:

1. "मेरी भव बाधा हरो, राधा नागरि सोय..."

अर्थ: यह बिहारी सतसई का पहला दोहा (मंगलाचरण) है। बिहारी राधिका जी से प्रार्थना करते हैं कि हे चतुर राधा! मेरे सांसारिक कष्टों को दूर करो, जिनके शरीर की परछाई पड़ने से ही भगवान कृष्ण प्रसन्न हो जाते हैं।

2. "कनक कनक तैं सौ गुनी, मादकता अधिकाय..."

अर्थ: (कनक = सोना/Gold, कनक = धतूरा)। कवि कहते हैं कि सोने (धन) में धतूरे से 100 गुना ज्यादा नशा होता है। धतूरा तो खाने पर नशा देता है, पर सोना (धन) तो पाने मात्र से ही इंसान को पागल (घमंडी) कर देता है।
अलंकार: यमक अलंकार।

3. "बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय..."

अर्थ: गोपियों ने कृष्ण से बात करने के लालच (बतरस) में उनकी बांसुरी (मुरली) छुपा दी है। जब कृष्ण मांगते हैं, तो वे कसम खाती हैं (सौंह करैं) कि नहीं ली, पर भौंहों से हंसती हैं (भौंहनु हँसै)। वे मुरली देना नहीं चाहतीं ताकि कृष्ण उनसे बातें करते रहें।

4. "कहत, नटत, रीझत, खिजत..."

अर्थ: "भरे भौन में करत हैं, नैननु ही सब बात"। भीड़-भाड़ वाले कमरे में नायक और नायिका आँखों ही आँखों में सारी बातें (प्यार का इजहार, इंकार, रूठना, मानना) कर लेते हैं और किसी को पता नहीं चलता।

3. Previous Year Questions (Test)

Q1. केवट ने राम के पैर धोने की ज़िद क्यों की?
(A) वह राम का भक्त था
(B) उसे डर था कि नाव नारी न बन जाए ✅
(C) उसे पैसे चाहिए थे
(D) राम ने उससे कहा था


Q2. 'कनक कनक तैं सौ गुनी' में 'कनक' का दूसरा अर्थ क्या है?
(A) गेहूँ
(B) धतूरा ✅
(C) चांदी
(D) हीरा


Q3. गोपियों ने कृष्ण की मुरली क्यों छुपाई?
(A) उन्हें मुरली पसंद थी
(B) कृष्ण को सताने के लिए
(C) बात करने के लालच में (बतरस लालच) ✅
(D) चोरी करने के लिए


Q4. बिहारी ने अपने पहले दोहे में किसकी वंदना की है?
(A) राम की
(B) गणेश की
(C) राधा (राधा नागरि) की ✅
(D) सरस्वती की

(Day-3 Complete!)

अगला टॉपिक (Day-4): आधुनिक कवि (मैथिलीशरण गुप्त & दिनकर)

Next Chapter ➔

Post a Comment